
कोहिनूर हीरे को भारत लाने की कवायद चल रही हैl हीरा मुख्यत शुक्र का प्रतिनिधित्व करता है जातक पारिजात के अनुसार “असुराचार्यस्य वज्रम” असुरो के आचार्य का शुक्र का रत्न हीरा है l
अशुभ लक्षणों वाले हीरे विनाश का कारण होता है
आचार्य वराहमिहिर नें तो बृहतसंहिता में स्पष्ट लिखा है कि
काकपदमक्षिका केशधातु युक्तानि शकरैर्विद्धम l
द्विगुणाश्चि दग्धकत्रस्तविशीर्णानि न शुभानि ll
अब कोहिनूर हीरे की बात करते हैं
संसार का सबसे हीरा कोहिनूर को माना गया है इसे (Mountain of Light ) भी कहते हैं l कहते हैं कि यह महाभारत के शूरवीर योद्धा कर्ण के पास था जो उसके दुर्भाग्य का कारण बना इसका प्रमाणित उल्लेख इतिहास में 1304 में मिलता है ज़ब यह मालवा के राजा के पास था फिर मालवा का राजा का वंशज युद्ध में बाबर के हाथों मारा गयाl बाबर के पास यह 1739 तक रहा बाबर परशिया के नादिरशाह के हाथों परास्त हुआ उसकी जैसे तैसे जान तो बच गई पर नादिरशाह उससे हीरा छीन कर ले गया नादिरशाह सिक्खों के हाथों मारा गया कोहिनूर हीरा सिक्ख दरबार की शोभा बना पर ज्यादा दिन वहां भी न रह सका ईस्ट इंडिया कंपनी ने सिखों को युद्ध में हरा कर उनसे हीरा छीन कर सन 1849 में महारानी विक्टोरिया को भेट किया महारानी विक्टोरिया ने 186 कैरेट के हीरे को छेदित करवा कर अपने मुकुट मे जड़वा दियाl इससे इस हीरे का वजन 108.93 कैरेट ही रह गया इसके साथ ही ग्रेट ब्रिटेन का चमकता सूर्य भी अस्ताचल की ओर चला गया अब यह हीरा “लंदन टावर” के म्यूजियम की शोभा बढ़ा रहा है l अब देखना है की इस रहस्यमय हीरे को पुनः भारत मे लाने के क्या परिणाम आते है